Download Cyber Classes Android App from playstore

Skip to main content

श्राद्ध या पितृ-पक्ष

 

श्राद्ध या पितृ-पक्ष

 

हिंदू धर्म में वैदिक परंपरा के अनुसार अनेक रीति-रिवाज़, व्रत-त्यौहार व परंपराएं मौजूद हैं। हिंदूओं में मानव  के गर्भधारण से लेकर मृत्योपरांत तक अनेक प्रकार के संस्कार किये जाते हैं यधपि अंत्येष्टि को अंतिम संस्कार माना जाता है। लेकिन अंत्येष्टि के पश्चात भी कुछ ऐसे कर्म होते हैं जिन्हें मृतक के संबंधी विशेषकर संतान को करना होता है। श्राद्ध कर्म उन्हीं में से एक है।



श्राद्ध क्या है ?

श्रद्धया इदं श्राद्धम्‌ (जो श्र्द्धा से किया जाय, वह श्राद्ध है।) भावार्थ है प्रेत और पित्त्तर के निमित्त, उनकी आत्मा की तृप्ति के लिए श्रद्धापूर्वक जो अर्पित किया जाए वह श्राद्ध है।

हिन्दू धर्म में माता-पिता की सेवा को सबसे बड़ी पूजा माना गया है। जन्मदाता माता-पिता को मृत्यु-उपरांत लोग विस्मृत न कर दें, इसलिए उनका श्राद्ध करने का विशेष विधान बताया गया है। भाद्रपद पूर्णिमा से आश्विन कृष्णपक्ष अमावस्या तक के सोलह दिनों को पितृपक्ष कहते हैं जिसमे हम अपने पूर्वजों की सेवा करते हैं।

आश्विन कृष्ण प्रतिपदा से लेकर अमावस्या तक ब्रह्माण्ड की ऊर्जा तथा उस उर्जा के साथ पितृप्राण पृथ्वी पर व्याप्त रहता है। धार्मिक ग्रंथों में मृत्यु के बाद आत्मा की स्थिति का बड़ा सुन्दर और वैज्ञानिक विवेचन भी मिलता है। पुराणों के अनुसार वह सूक्ष्म शरीर जो आत्मा भौतिक शरीर छोड़ने पर धारण करती है प्रेत होती है। प्रिय के अतिरेक की अवस्था "प्रेत" है क्यों की आत्मा जो सूक्ष्म शरीर धारण करती है तब भी उसके अन्दर मोह, माया भूख और प्यास का अतिरेक होता है। सपिण्डन के बाद वह प्रेत, पित्तरों में सम्मिलित हो जाता है।

पितृ पक्ष का समय

वैसे तो प्रत्येक मास की अमावस्या तिथि को श्राद्ध कर्म किया जा सकता है लेकिन भाद्रपद मास की पूर्णिमा से लेकर आश्विन मास की अमावस्या तक पूरा पखवाड़ा श्राद्ध कर्म करने का विधान है। इसलिये अपने पूर्वज़ों को के प्रति श्रद्धा प्रकट करने के इस पर्व को श्राद्ध कहते हैं।

 

 

पितृ पक्ष का धार्मिक महत्व

पौराणिक ग्रंथों में वर्णित किया गया है कि देवपूजा से पहले जातक को अपने पूर्वजों की पूजा करनी चाहिये। पितरों के प्रसन्न होने पर देवता भी प्रसन्न होते हैं। यही कारण है कि भारतीय संस्कृति में जीवित रहते हुए घर के बड़े बुजूर्गों का सम्मान और मृत्योपरांत श्राद्ध कर्म किये जाते हैं। इसके पिछे यह मान्यता भी है कि यदि विधिनुसार पितरों का तर्पण न किया जाये तो उन्हें मुक्ति नहीं मिलती और उनकी आत्मा मृत्युलोक में भटकती रहती है। पितृ पक्ष को मनाने का ज्योतिषीय कारण भी है। ज्योतिषशास्त्र में पितृ दोष काफी अहम माना जाता है। जब जातक सफलता के बिल्कुल नज़दीक पंहुचकर भी सफलता से वंचित होता हो, संतान उत्पत्ति में परेशानियां आ रही हों, धन हानि हो रही हों तो ज्योतिषाचार्य पितृदोष से पीड़ित होने की प्रबल संभावनाएं बताते हैं। इसलिये पितृदोष से मुक्ति के लिये भी पितरों की शांति आवश्यक मानी जाती है।

किस दिन करें पूर्वज़ों का श्राद्ध

वैसे तो प्रत्येक मास की अमावस्या को पितरों की शांति के लिये पिंड दान या श्राद्ध कर्म किये जा सकते हैं लेकिन पितृ पक्ष में श्राद्ध करने का महत्व अधिक माना जाता है। पितृ पक्ष में किस दिन पूर्वज़ों का श्राद्ध करें इसके लिये शास्त्र सम्मत विचार यह है कि जिस पूर्वज़, पितर या परिवार के मृत सदस्य के परलोक गमन की तिथि याद हो तो पितृपक्ष में पड़ने वाली उक्त तिथि को ही उनका श्राद्ध करना चाहिये। यदि देहावसान की तिथि ज्ञात न हो तो आश्विन अमावस्या को श्राद्ध किया जा सकता है इसे सर्वपितृ अमावस्या भी इसलिये कहा जाता है। समय से पहले यानि जिन परिजनों की किसी दुर्घटना अथवा सुसाइड आदि से अकाल मृत्यु हुई हो तो उनका श्राद्ध चतुर्दशी तिथि को किया जाता है। पिता के लिये अष्टमी तो माता के लिये नवमी की तिथि श्राद्ध करने के लिये उपयुक्त मानी जाती है।



पितृ-पक्ष - श्राद्ध पर्व तिथि व मुहूर्त 2020

पितृ पक्ष 2020

1 से 17 सितंबर

पूर्णिमा श्राद्ध – 1 सितंबर 2020

सर्वपितृ अमावस्या – 17 सितंबर 2020

गया जी

जब बात आती है श्राद्ध कर्म की तो बिहार स्थित गया का नाम बड़ी प्रमुखता व आदर से लिया जाता है। सम्पूर्ण विश्व में दो स्थान श्राद्ध तर्पण हेतु बहुत प्रसिद्द है। वह दो स्थान है बोध गया और विष्णुपद मन्दिर - विष्णुपद मंदिर वह स्थान जहां माना जाता है कि स्वयं भगवान विष्णु के चरण उपस्थित है, जिसकी पूजा करने के लिए लोग देश के कोने-कोने से आते हैं। गया में जो दूसरा सबसे प्रमुख स्थान है जिसके लिए लोग दूर दूर से आते है वह स्थान एक नदी है, उसका नाम "फल्गु नदी" है। ऐसा माना जाता है कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम ने स्वयं इस स्थान पर अपने पिता राजा दशरथ का पिंड दान किया था। तब से यह माना जाने लगा की इस स्थान पर आकर कोई भी व्यक्ति अपने पितरो के निमित्त पिंड दान करेगा तो उसके पितृ उससे तृप्त रहेंगे और वह व्यक्ति अपने पितृऋण से उरिण हो जायेगा | इस स्थान का नाम ‘गया’ इसलिए रखा गया क्योंकि भगवान विष्णु ने यहीं के धरती पर असुर गयासुर का वध किया था। तब से इस स्थान का नाम भारत के प्रमुख तीर्थस्थानो में आता है और बड़ी ही श्रद्धा और आदर से "गया जी" बोला जाता है।

वैज्ञानिक दृष्टिकोण से श्राद्ध महत्व

अपने पूर्वजों के निमित्त दी गई वस्तुएँ सचमुच उन्हें प्राप्त होती हैं या नहीं, इस विषय में अधिकांश लोगों को संदेह है। हमारे पूर्वज अपने कर्मानुसार किस योनि में उत्पन्न हुए हैं, जब हमें इतना ही नहीं मालूम तो फिर उनके लिए दिए गए पदार्थ उन तक कैसे पहुँच सकते हैं? क्या एक ब्राह्मण को भोजन कराने से हमारे पूर्वजों का पेट भर सकता है? न जाने इस तरह के कितने ही सवाल लोगों के मन में उठते होंगे। वैसे इन प्रश्नों का सीधे-सीधे उत्तर देना सम्भव भी नहीं है, क्योंकि वैज्ञानिक मापदण्डों को इस सृष्टि की प्रत्येक विषयवस्तु पर लागू नहीं किया जा सकता। दुनिया में ऐसी कई बातें हैं, जिनका कोई प्रमाण न मिलते हुए भी उन पर विश्वास करना पड़ता है।

प्राचीन सनातन धर्म की सभी परम्पराए अपना एक वैज्ञानिक आधार रखती है श्राद्ध भी इससे अलग नहीं है श्राद्ध के जरिये भी प्रकृति को जिन्दा रखने की कोशिस की गयी है सच्चे श्राद्ध” के चार मुख्य अंग है। हवन, पिण्डदान, तर्पण और उत्तम व्यक्ति को भोजन करना ही है। हवन से देवों की तृप्ति होती है। पिण्डदान से पितरों को संतुष्टि होती है और सरोवर व स्नान कर जलाञ्जल्ली देते वक्त अपने अभीष्ठ मृत व्यक्ति का स्मरण करें और फिर बाद में उत्तम व्यक्तियों को भोजन कराए। यही श्राद्ध का सुगम और सरल रूप है। इस समय पितरों का स्मरण कर ध्यान लगते हुये जो कुछ क्रिया करते हैं उनको तृप्ति प्राप्त होती ही है |



पितृपक्ष में प्राय: कौवे, कुत्ते और गाय को भोजन परोसा जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि श्राद्धों में कौवा क्यों जरूरी है?

कौवे को संरक्षण देने के प्रति ना केवल धार्मिक अवधारणा है, बल्कि विज्ञान जगत ने भी इस पर गहन अध्ययन किया है, जिसके अनुसार कौवे का प्रकृति तथा मानव जीवन का गहरा संबंध है। महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय रोहतक के हर्बल गार्डन के अधीक्षक डॉ. सुरेंद्र भारद्वाज ने बताया कि कौवा बरगद और पीपल के फल निगलता है। फलों के ऊपर का गुद्दा उसके पेट में पच जाता है और उसके पाचन तंत्र में गुठली के जमाव की प्रक्रिया तैयार होती है। इसकी आंतों में ऐसा एंजाइम होता है जो गुठली को अंकुरित करने के लिए अनुकूल वातावरण देता है। ऐसे में जब कौआ कहीं बीट करेगा, वहां पर बरगद व पीपल का तैयार बीज गिरता है और उसका जल्द ही जमाव होने लगता है। यही वजह है कि इमारतों पर व धरती पर जहां-तहां स्वत: ही पीपल के पेड़ उग जाते हैं। पीपल व बरगद ऐसे पेड़ हैं, जिनमें से ऑक्सीजन 24 घंटे निकलती रहती है। यदि कौवे को संरक्षण ना मिले तो बरगद व पीपल के पेड़ विलुप्त होने का खतरा बढ़ेगा। उन्होंने बताया कि मादा कौवा भादो के महीने में अंडा देती है। भादो महीने में ही पितृपक्ष आता है। नौ दिन में कौवे का बच्चा अंडे से बाहर निकल आता है। मादा कौवा घरों की छतों से पितरों के निमित्त रखा भोजन उठाकर ले जाती है। यह आहार पौष्टिक होता है, जिसे वह रोजाना अपने बच्चों को खिलाती है। इससे कौवे की प्रजाति भी बढ़ती रहती है। इसलिए इन पौधों का औषधीय महत्व भी है। इनके संरक्षण के लिए कौवे का जीवित रहना जरूरी है। इसलिए कौवे का ग्रास निकाला जाता है।

हमारे youtube चैनल को subscribe करे 


👉click here to read other cultural post

Compiled By: Vijay Verma

Comments

Popular posts from this blog

Myths about Covid -19

Myths about Covid-19 1 Can Covid-19 be transmitted through goods produced in countries where there is ongoing transmission?  Explain: Although it can last on surfaces for many hours, but the environment, transportation and varying temperatures during shipment make it difficult for the virus to remain active. If you feel the surface may be contaminated, clean it with a disinfectant and wash your hands after touching it.   2 Can Covid-19 be transmitted through mosquitoes? Explain:  There is no evidence that the novel coronavirus can be transmitted through mosquitoes. The virus can be spread through droplets from coughing, sneezing or a patient’s saliva. 3 How can we be sure that our clothes don’t spread coronavirus 2019? Explain:  Besides showering every day, you should wash your clothes using detergent or soap in 60-90 ํC water or add bleach. Dry the clothes in a high temperature dryer or in the sun. 4 Can drinking alcohol help prevent Covid-19? Explain:...

Rajasthan Computer Teacher Recruitment News

  Rajasthan Computer Teacher Recruitment 2021 News Update 28-Aug-2021:  वित्त विभाग के द्वारा कंप्यूटर अनुदेशक भर्ती को मिली मंजूरी  वित्त विभाग ने कंप्यूटर अनुदेशक भर्ती को नियमित करने की स्वीकृति प्रदान कर दी है यह भर्ती 10453 पदों पर प्रस्तावित है  इससे  राजकीय विद्यालयों में प्रशिक्षित शिक्षकों के माध्यम से कम्प्यूटर शिक्षा की आवश्यकता की पूर्ति की जा सकेगी तथा बड़ी संख्या में युवाओं को कम्प्यूटर अनुदेशक के पद पर स्थायी रोजगार के अवसर मिल सकेंगे।   22-July-2021: कम्प्यूटर अनुदेशकों की नियमित भर्ती होगी  राज्य मंत्रिमंडल एवं मंत्रिपरिषद की बैठक में विद्यालयों के लिए कम्प्यूटर अनुदेशकों की नियमित भर्ती करने के लिए  सैद्धांतिक सहमति दी है जल्द ही होगी 10000 कंप्युटर अनुदेशक की भर्ती  19 June 2021: कम्प्यूटर शिक्षकों के नए कैडर के लिए 10,453 पदों का सृजन संविदा आधार पर आवश्यक तत्काल भर्ती के लिए स्वीकृति प्रदेश के राजकीय विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार और विद्यार्थियों को कम्प्यूटर शिक्षा से जोड़ने के उद्देश्य से राज्य सरकार...

RuPay Card, VISA Card और MasterCard के बीच क्या अंतर है?

  RuPay Card, VISA Card और MasterCard के बीच क्या अंतर है ?             आजकल डिजिटल के दौर में हम सभी कैशलेस या ऑनलाइन पेमेंट करना चाहते हैं और इसके लिए हम या तो क्रेडिट कार्ड या फिर डेबिट कार्ड का इस्तेमाल करते हैं. क्या आपने कभी ध्यान दिया है कि क्रेडिट या डेबिट कार्ड पर RuPay Card, Visa Card या MasterCard लिखा होता है , भले ही हमने यह किसी भी बैंक से लिया हो. ऐसा क्यों होता है , क्या इनके बीच में कोई अंतर है , क्या RuPay Card अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस्तेमाल किया जा सकता है , इत्यादि के बारे में आइये इस लेख के माध्यम से अध्ययन करते हैं. पहले लोग पैसा निकालने के लिए बैंक जाते थे और लम्बी-लम्बी लाइनों में लगते थे और भी लोगों को कई परेशानी  का सामना करना पढ़ता था. इन सब बातों को ध्यान में रखते हुए बैंक ने ATM मशीन और ATM से पैसा निकलने के लिए क्रेडिट या डेबिट कार्ड को लागू किया. इसको प्राप्त करने के लिए बैंक में apply करना पढ़ता है. अब लोग बैंक ना जाकर ATM से अपना पैसा निकालने लगे हैं. यानी ये कार्ड एक प्रकार से Payment Gateway Card है V...