नाग पंचमी वासुकिः तक्षकश्चैव कालियो मणिभद्रकः। ऐरावतो धृतराष्ट्रः कार्कोटकधनंजयौ ॥ एतेऽभयं प्रयच्छन्ति प्राणिनां प्राणजीविनाम् ॥ ( भविष्योत्तरपुराण ) ( अर्थ : वासुकि , तक्षक , कालिया , मणिभद्रक , ऐरावत , धृतराष्ट्र , कार्कोटक और धनंजय - ये प्राणियों को अभय प्रदान करते हैं। ) हिन्दू संस्कृति ने पशु - पक्षी , वृक्ष - वनस्पति सबके साथ आत्मीय संबंध जोड़ने का प्रयत्न किया है। हमारे यहां गाय की पूजा होती है। कई बहनें कोकिला - व्रत करती हैं। कोयल के दर्शन हो अथवा उसका स्वर कान पर पड़े तब ही भोजन लेना , ऐसा यह व्रत है। हमारे यहाँ वृषभोत्सव के दिन बैल का पूजन किया जाता है। वट - सावित्री जैसे व्रत में बरगद की पूजा होती है , परन्तु नाग पंचमी जैसे दिन नाग का पूजन जब हम करते हैं , तब तो हमारी संस्कृति की विशिष्टता पराकाष्टा पर पहुंच जाती है। नाग पंचमी कब मनाया जाता है नाग पंचमी का पर्व सावन माह की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है। नाग ...
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